1. अगाध

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    दिल की गेहराई मे देख जरा। अंदर जो जल रहा ,उसे रोख जरा जला तो राख सा तू,दिये के साये मे तू।। दिल की गेहराई मे देख जरा। उठी है जो लेहरे अंदर, उसे तू पहचान जरा डुबा तो लाश सा तू,यादो के अंगण मे तू।। दिल की गेहराई मे...