1. लक्ष्य

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    विलंब अभी हुआ नहीं,लक्ष्य की प्राप्ति को। उठा पग बना डगर,विजय के एहसास को। कल मिली पराजय,क्यों बनी है व्यथा आज को। कर फिर एक कोशिश,विजय उन्माद को। जीव-जीवित कर्म से,निश्चल मन विश्वास को। पाप की तो व्यथा निराली,जीता सिर्फ स्वार्थ को। मन में रख लक्ष्य अडिग,सरयू भी निगलती पहाड़...