1. मुखौटा……

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    मेरे व्यक्तित्व का एक हिस्सा कल खामोश था न रोष, न जोश छत – विछत गिरा खुद के आगोश में था मेरे व्यक्तित्व का एक हिस्सा… मुखौटा मेरा बातें मुझसे ही कर रहा था रह – रह मुझको देख रहा था और पूछ रहा था क्यों मुझको लगाते हो ?...