माँ तुम बदल गई हो क्या?

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माँ तू बदल गई है क्या-२
जो पहले मुझे कहती थी अलग हज़ारो मे,
अब खुद नजाने क्यों गायब है उस आसमान के लाखो चाँद तारो मे,
अब तू मुझे हर पल नही कहती खोने को उन किताबो मे,
मगर हा-२
तू अब भी मुझे कही दिख जाती है मेरे छोटी सी छोटी मुश्किलो के सहारा मे,
जैसे अगर मै गिरु कस्तियो के किनारो पे
तो तू मुझे दे सहारा बचा लेती है सारे सैतानो से।।

आज पता नही पापा कुछ ज़यादा रो रहे है,
जैसे तुझे वो हमेसा के लिए खो रहे है,
नानाजी कहते की तेरी अंतिम डोली अपने कंधो पे वो ढ़ो रहे है,
और एक फूलमाला और एक मोमबत्ती एक ऊँचे से जगह पे जाने क्यों हम सब संजो रहे है ,
आज पता नही माँ,
पापा तेरे साथ नही ब्लकि तेरी एक तस्वीर और बिस्तर पे अपने साथ आँखों में नमि लिए सो रहे है।।

नजाने कैसी नुका छिपी तू खेल रही है मेरे साथ माँ
जो छुप तो जाती हूँ मैं मगर धप्पा के साथ नही बजते पीठ पे मेरे तेरे वो हाथ,
नजाने क्यों शांत है तु,
जाने क्यों नही डांटती हर पल मुझे यु,
मै तो बताती तुझसे
अपनी हर दिन कि बात,
वो जिसे मै किसी से न बोलती थी ना
हर वो राज,
मगर शायद तू मुझसे थोड़ी है नाराज़,
इसलिये शायद करती नही अपनी बातो कि शुरूआत,
तेरी याद आये तो तेरे पास आ मै रोती हर रात
तूने मगर मेरी सुनी नही शायद वो सिसक सिसक कर रोती हुई आवाज़,
जाने कितने सख्त है तेरे वो जज़्बात,
जो मेरे आँशु भी न पहुचे तेरे दिल के पास,
आब तू ही बता दे माँ की,
क्या अब मै नही हूँ तेरे लिए बेटी वो खास।।

कभी पापा से तेरे बारे में पुछु तो कहते की
गहराई में है तेरा घर,
धरती के नीचे बंद डब्बे में बसा है तेरा और तेरे जैसों का अपना एक शहर,
भले हो यहाँ दिन या दोपहर
वहां तो हर पल है अँधेरे का ही कहर,
मग़र जाने क्यों ये कहते कहते बरसे पापा के चेहरे से आंशुओ कि लहर।।

म्गर अभी छोड़ि नही तेरे हाथो से फिरसे खाना खाने कि मैंने आस
और जभी तेरे याद आए तो देखती हूँ मै वो नीला आकाश
क्योंकि लोग मुझसे कहते है कि तेरा अब वही है वास
जाने क्यों तुझे कहते एक लाश।

माँ पता नही तू कहा चली गई है,
मेरी बातो को नजाने अनसुना क्यों कर रही है
मेरी आंशुओ को क्यों नही तू पूछ रही है
मेरी उदासी देख तू क्यों नही मुझे फिरसे मना रही है
माँ क्या तू बदल गई है?-२

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