1. मातृ-भू का मान रखने के लिए

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    मातृ-भू का मान रखने के लिए (१) मित्रता की आड़ में वैरी कोई- विश्वास की दुल्हिन सदा छलता रहे। ज्वालामुखी-सा, तब धधकता देह में- संधि का सूरज अगर ढलता रहे।। (२) सभ्यता के आचरण मैले बनें, अन्याय का दुर्भाव पलता ही रहे। तब असंभव है कि दीपक शान्ति का- अनवरत्,...