आह्वान

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आह्वान

अरे सोये हुए माँ भारती के नौजवानों |
आह्वान है तुमसे कि अपने शस्त्र तानो ||
नहीं अब सोचने का ये समय है |
करो कुछ कर गुजरने का समय है ||
प्रभु श्री राम से लो प्रेरणा तुम |
मिटाओ आज जन कि वेदना तुम ||
अकेले राम ने मारा कई को |
उठो क्या सोचना तुम तो कई हो ||
उठो वीरों न अब कुछ खौफ खाओ |
कहाँ बिखरे हो ख़ुद में एका लाओ ||
जो खतरा था परायों से टला है |
मगर अपनों से ही खतरा बड़ा है ||
इन्ही अपनों को अब रास्ता दिखाओ |
बचाओ माँ की इज्ज़त को बचाओ ||
तुम्हीं पर धरती माँ का क़र्ज़ है ये |
करो पूरा इसे अब फ़र्ज़ है ये ||
तुम्हीं हो इसके नव निर्माणकर्ता |
तुम्हीं से आस इसको दिख रही है ||
न सह पाती है अपनों का छलावा |
बड़ी बेबस सी होकर बिक रही है ||
बचा लो आज अपनी धर्मभूमि |
बचा लो आज अपनी कर्मभूमि ||
ये ‘तन्हा’ सी खड़ी ख़ुद पर है रोये |
बचा लो आज अपनी जन्मभूमि ||

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