इंकलाब चाहिए………

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आज फिर वो वक़्त है जहा इंकलाब चाहिए
मेरे वतन की हर एक आत्मा आज़ाद चाहिए,

क्यों लाल झंडे के नीचे
कफ़न में लिपटे लोग हे ?
क्यों खून बहते है यहाँ
अपनों का अपने ही लोग हे ?
क्यों रोष हे उनमे इतना
और क्यों वो अनसुने से लोग हे ?
क्यों बैठते नहीं वो मंच पर
क्यों हल नहीं निकलते ये लोग हे ?

आज फिर हमें एक सरदार पटेल चाहिए,
आज फिर वो वक़्त है जहा इंकलाब चाहिए,
मेरे वतन की हर एक आत्मा आज़ाद चाहिए,

आज सडको पर चलता हुआ
डरता हे आम आदमी,
जीता हे घुट घुट कर
हर डरता हुआ आदमी,
क्यों ये धमाको की आवाजे
और चीखे ख़त्म नहीं होती,
क्यों आज कश्मीर में
एक आम सुबह नहीं होती,

आज फिर हमें एक सुभाष बोस चाहिए,
आज फिर वो वक़्त है जहा इंकलाब चाहिए,
मेरे वतन की हर एक आत्मा आज़ाद चाहिए,

यहाँ क़त्ल-ए-आम हे
जात के नाम पर,
मिट रही इंसानियत
क्यों धर्म के नाम पर ?
क्यों स्त्रियों के दामन पर
खून ही खून हे ?
क्यों लुटती हे आबरू
धर्म जात के नाम पर ?

आज फिर हमें एक मोहनदास गाँधी चाहिए,
आज फिर वो वक़्त है जहा इंकलाब चाहिए,
मेरे वतन की हर एक आत्मा आज़ाद चाहिए,

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