इंतज़ार है मुझे

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मायने आजादी आज फिर मुख्तलिफ है,
कल देश को थी आज हमको ही अपनी जरूरत है,
इक आजादी हमने कई शहादतों से पाई है,
इक गुलामी के चलते अब तो जान पे बन आई है।

तब बंटी थी सीमाएं और दिल थे छलनी हुए,
उस समय के घाव जो थे वो न अब तक भरे,
मजहब के सीने में चुभा था जो खंज़र उस समय,
आज भी दूर तक उसके खून के कतरे मिले।

दम भर जो बैठे अपने सारे गीले, सूखे ज़ख्म लिए,
चीन के हमले से फिर कुछ नए नश्तर चुभे,
दर्द और धोखे की फरेहिस्त और लम्बी हो गई,
हिन्दोस्तां के माथे पे हार के भी कंकर लगे।

रफ्ता रफ्ता फिर भी हम जिन्दगी की रौ में बह गए,
चोट जो दिल पे लगी थी उसको हँस के सह गए,
माझी की दुश्वारियां तब बस किस्से बन के रह गए,
सुनहरे मुस्तकबिल के सपने आँखों में बस के रह गए।

और पहले तो फटे चाक हमने सब रफू किये,
दुश्मनों के दिए जख्मों से भी कई सबक लिए,
दोस्ती के रूप को भी हमने नए मायने दिए,
अपनी रक्षा को भी कुछ बेहतर आयाम दिए।

दूध की किल्लत का नामोनिशां ही हमने मिटा दिया,
खेतो में चलते थे जो हल उनको ही ताकत अपनी बना लिया,
ला के कुछ तबदीलियाँ इसका नक्शा ही बदल दिया,
दुनिया के परदे पे इसको एक नया मुकाम दिया।

आज सोचो तो मन इस बात से इतराता भी है,
पर खुली आँखों से इक और सच दिखलाता भी है,
आज के सरपरस्त बस व्यापारी बन के ही रह गए,
देश की जगह खुद के फायदे में ही उलझ के रह गए।

आज भी सड़कों पे भूखा बचपन है देखो रो रहा,
और देश का नौजवां नाउम्मीदी के फर्श पे है सो रहा,
स्वदेशी का नारा दूर कहीं पे तार तार है हो रहा,
और बाहर के मुल्कों का बोलबाला है हो रहा।

आज भी बेटे के जन्म पे मिठाईयां बांटी जाती है,
और बेटियों के पैदा होने पे चुप्पी सी छा जाती है,
आज भी निठारी जैसे किस्सों से गर्दन हमारी झुक जाती है,
और माँ बहनों की आबरू सरे आम ही लुटी जाती है।

क्या करे, कैसे करे, इन सवालों को फिर से दोहराना होगा,
अब तो अपने अन्दर जज्बातों का इक जलजला लाना होगा,
जंग लगी इन बेड़ियों को अब कही बहा कर आना होगा,
बरसों से जमे जवां खून में उबाल तो लाना होगा।

वो हसरतें जो हमने इस पाक सरजमीं के लिए सजाई थी,
वो आजादी जो हमने कई शहादतो के बाद पाई थी,
उस आजादी को आज पूरी तरह से पाना होगा,
मुद्दों की इस दलदल से इस देश को बाहर लाना होगा।

सोच की इन लहरों में जब यह तूफां आएगा,
तब ही सोये हुए इस वतन में इन्कलाब आएगा,
और धुंधला चुका सूरज चमक के सामने आ जायेगा,
शायद मायने आजादी भी तब ही समझ में आएगा।

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