इस आजादी,कुछ आजादी कम की जाये

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इस आजादी, कुछ आजादी कम की जाये
नहीं सुरक्षित भ्रूण कन्या,कुछ बेड़ियाँ तय की जाएँ ।
बढ़ती हुई कोपलों को, एक सी सीख दी जाये
अधिकार कानून ने दिए,थोड़ा तो सम्मान दिया जाये ।
विचार गोष्ठियाँ,रैलियाँ, आयोजनों का मेला लगा
खुद के स्तर को समझ, ‘सच’ में कुछ तो किया जाये ।
नहीं दिखाना किसी को नीचा,कोई बड़ी बात नहीं
दोनों हाथोँ की ताकत से किसी को तो उठाया जाये ।
दिल जलता है लबों पे हँसी, देख दूसरों की ख़ुशी
ह्रदय बड़ा कर लबों की हवा से जलते दिल को बुझाया जाये ।
सब्जी,रिक्शा,ज़मीनी सामान सब लगता मंहगा बड़ा
चलो इक रोज ज़रा, ‘शेष’ पे ध्यान लगाया जाये ।
गुलामी बुरी थी या कि भली है आजादी
छोड़ बहस ये,खुद पे गौर फ़रमाया जाये
इस आजादी,कुछ आजादी कम की जाये ।

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