ईमान

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बालकों में कमी है ज्ञान की
बडों के सम्मान की।
युवाओं का भी बडा बुरा हाल है,
एक्शन फिल्मों से ज्यादा
विधान सभा में बवाल हैं।

गांधी की तस्वीर के नीचे
रिश्वतखोरी होती है,
सरकार छोडो, अब तो
परिवार में भी राजनीति होती है।

बाबू नेता की सुनता है
नेता सुनता है गुंडों की,
सरदार दीदी की सुनता है
और दीदी अपने मन की।

जब बैठा एक साधु अनथन पर
इल्ज़ाम लगा कि वह राजनीति में आना चाहता है!
बैठा जब बूढ़ा
इल्ज़ाम लगा कि दल में उसके भ्रष्टाचार है!
पर कोई वक्ता से
क्या वह राजनीति में नहीं?
क्या दल उसका भ्रष्ट नहीं?

सत्य की चिंगारी तो है पर आग को ईंधन नही।
जोशीले युवा तीर तो हैं पर कोई कमान नहीं।
सब कुछ है मेरे देश में बस एक ईमान नहीं।

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