ए कलम तू कर मदद

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एक अनकही कहानी लबज़ों की जुस्तजू मे भटक रही है कहीं,
ए कलम,तू करे मदद तो मिले पहचान उसे खुद मे ही…
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कुछ आदम्या एहससों ने बना लिया है दिल मे ही अपना आशियाना,
ए कलम,तू करे मदद तो सारे जज़्बात बाहर आएँगे तो सही…
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वो पुकारें तो पुकारे किसे,सारा जहाँ है सदा ही स्वार्थी,
ए कलम,तू करे मदद तो मिल जाए अब मंज़िल यहीं…
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ये महेंगाई है गगनचुंभी,इसका हल मिले तो कैसे मिले,
ए कलम,तू करे मदद तो कोई आगे आज आएगा तो सही…
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अमीरो को है बिरियानी खानी,राजनीति ने दुनिया लूटी,
ए कलम,तू कर मदद वरना ग़रीबों क लिए रोटी भी नही

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