ऐसी होली

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“ऐसी होली खेलो लाल, ऐसी होली,
लेकर कराल करवाल , सुख का मंगल तिलक करो लाल|
ऐसी होली खेलो लाल, ऐसी होली |

जन्मभूमि का ऋण चुकाने को , सुख का मंगल तिलक करने को,
माता की आरती पुकारती , तेरे खड़ग उस दीप की बाती,
तुम स्वतन्त्रता के रक्षक हो, मुक्ति विरोधी के भक्षक हो,
लेकर कराल करवाल , माता का मंगल करने को लाल |
ऐसी होली खेलो लाल, ऐसी होली |

राष्ट्र हित में युद्ध करने को, धर्मराज को लाने को,
लाल, माँ तुझको पुकारती ,करवाल पकवान तुझको लाती|
लेकर कराल करवाल ,सुखदायी प्रलय को लाओ लाल |
ऐसी होली खेलो लाल, ऐसी होली |

खेलेगी माँ सिन्दूरी होली, नारी तेरी ही सिन्दूर की होली,
गूंजेगी माँ तेरे अमरत्व की बोली, सजने दे माँ हमरे प्राणों की डोली,
लेकर कराल करवाल , रक्त होली में हो जाओ निहाल |
ऐसी होली खेलो लाल, ऐसी होली |

फिर ना आयेगी लाल ऐसी होली, खेलेगी संग दुश्मन की टोली,
हंस पड़ेगी माँ देख सूरत भोली, ” हमरे प्यारे सुत हो तू “माता बोली |
ऐसी होली खेलो लाल, ऐसी होली |”

“परदेसी भी खेलो तुम ऐसी होली, तेरे आत्मा की बेड़ी ऐसे खोली,
आएगी माँ देख अब ऐसी होली,माँ अब तक तूने बहुत है रोली,
लेकर कृपाण पिचकारी आज, स्वाभिमान का लायेंगे ताज|

ऐसी होली खेलेंगे , हम ऐसी होली,
तेरे दुखों को हम हरने को, तेरी मंगल हम करने को,
लेकर कराल करवाल , शोभित करेंगे माँ तेरी दिव्य भाल |
ऐसी होली , हाँ माँ ऐसी होली |”

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