कौन रखेगा याद मुझे

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कैसे मनाऊं मैं आजादी,
अभी आजाद होना बाकी है
अभी आजाद होना बाकी है।

रूठने को तैयार पूर्वांचल,
कटने को तैयार कश्मीर।
हर तरफ है मुंह फैलाया,
सांपों का जंजाल यहां।
कितने हैं अभी भूखे नंगे,
उसे पूरा करना बाकी है।

लूटती है हर रोज,
यहां सैकड़ों पायल।
कितने ही दुल्हन की चूड़ियां,
होती हैं घायल।
गिरते पड़ते लोगों को,
सुरक्षा देना बाकी है।

फैल गया है समाज में,
धर्म और मजहब की बात।
राजनीति में भी आ गया,
जाति और वंशवाद।
इन सभी को अभी,
उखाड़ फेंकना बाकी है।

दोस्ताने व्यवहार ने दी,
कारगिर की चढ़ाईयां।
झेली है हमने,
एक दशक में तीन लड़ाइयां।
कितनी लड़ाइयां,
अभी और झेलना बाकी है।

कारवां गुजर गया,
साथ हो के विदेशी।
साथ लेकर अब चलें,
हर चीज स्वदेशी।
काम करना है अभी सभी,
जो करना बाकी है।
फिर मनाऊंगा मैं आजादी,
पूर्ण आजादी बाकी है।
पूर्ण आजादी बाकी है॥

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