घाती-कायरों से हम कभी नहीं डरते !

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घाती-कायरों से हम कभी नहीं डरते !

खेल-खेल में दबा के मुंह में सूरज लाल
बाल हनुमान नभ में कुलांचे भरते !
दूह लेते शेरनी को खेल-खेल में शिवाजी
भरत सिंहों के दांत खेलते ही गिनते !
भरते दहाड़ पृथ्वीराज वीर छत्रसाल
दूर-दूर दुश्मनों के कलेजे दहलते !
रग़ों में हमारी लहू उन्हीं शूरवीरों का है
घाती-कायरों से हम कभी नहीं डरते !

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