जागो भोर भई

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जागो भोर भई
घर मै बैठा कोसता हूँ, देश के हालात को
ये बुरा है, सब गलत है, रिश्वती अंदाज़ को
आज सो कर जब उठा, तो मन ने पुछा बावले
क्या दिया तुने अभी तक देश के अंजाम को
कोसते ही कोसते, उम्र बीती मगर
लूटेरे, लूटते रहे देश के हर गॉव को
देख निकले है दीवाने हाथ में मसाल है
आज मौका है, मिला ले, हाथो से अपने हाथ को
लूट का रावन हिमालय से बड़ा अब हो गया
अब लगेंगे हाथ लाखो, राम के हर बाण को
जंग मेरी ही नहीं, ये जंग तेरी भी तो है
जब लगेंगे हाथ सब, हिला देंगे इस बुनियाद को
रोने, कोसने, से जालिम कभी हिलता नहीं
पलट पन्ने इतिहास के, हक भीक में मिलता नहीं
या तू भी कूद जा, जंग के मचान पे
या कोसना तू बंद कर, जालिमो के नाम पे

— जीवन

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