डंका हम बजाते सदा-सर्वदा से आए हैं !

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डंका हम बजाते सदा-सर्वदा से आए हैं !

हिंद के सपूत कमजोर या कायर नहीं
डंका हम बजाते सदा-सर्वदा से आए हैं !
पीठ पीछे घात की , उसे भी नहीं छोड़ा ; लड़े
सामने उन्हें तो तारे दिन में दिखाए हैं !
राम कृष्ण दुर्गा के भक्तों ने न्याय के निमित्त
जब-तब अस्त्र-शस्त्र हाथों में उठाए हैं !
धूल है चटादी , यमलोक भेजा पापियों को
छक्के आतताइयों-दुश्मनों के छुड़ाए हैं !

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