‘देश के नौजवानों के लिए’

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आन, बान,अस्मिता लिए लड़ीं लड़ाईयां,
नौनिहालों शौर्य की सुन लो वो कहानियाँ,
जय भारती जय वीरभूमि जय –2 |
ललकारी थीं माँएं बहने अपनी आँख के तारों को,
सौंपके स्वर्नाभूषण चाँदी मंगल गले के हारों को,
स्वाभिमान का समर ढहाएं कटुता की दीवारों को,
कर में तिलक लगा पकडायीं दुधारी तलवारों को.
मातृभूमि के लिए होम हर कौम ने दीं जवानियाँ,
नौनिहालों शौर्य ……….जयभारती…….|
मुल्क मराठा जूझा था मुगलों के अत्याचारों से,
वतन परस्ती का जज्बा भर मतवाली हूँकारों से,
सत्ता छीन हुकूमत की गोरी शुरमेदारों से,
हिला दीं चूलें शूरवीरों ने इन्कलाव के नारों से,
शेर शिवाजी राणा प्रताप ने दीं अपनी कुर्बानियाँ,
नौनिहालों शौर्य …………जय भारती…….|
मनमानी की थीं अंग्रेजों ने जलियाँ वाले वाग में,
हल्दी घटी में राजपुताना आयुद्ध था उन्माद में,
कूदीं हजारों पद्द्मिनियाँ जौहर होने को आग में,
कई मिसालें गौरव की इस माटी की नाभि में,
वफादार चेतक की रण में चौकड़ी कलाबाजियाँ,
नौनिहालों शौर्य ……….जय भारत ………|
सर पे बांध तिरंगा सेहरा जाबांजी दिखलाई थी,
सीने पे जाने कितनी गोली दीवानों ने खाई थीं,
देख दीवानगी वीरों की ये धरती भी थर्राई थी,
प्राण दुलारों की आहुति पे ये आज़ादी पाई थी,
खेल खून की होली तोड़ी परतंत्रता की बेड़ियाँ,
नौनिहालों शौर्य……..जय भारती……,,|
लहर-लहर लहराये केसरिया शान से अभिमान की,
महाप्रसाद ये स्वतंत्रता का वीरों के बलिदान की,
ऋण तभी चुका पायेगा भारत होठों के मुस्कान की,
छाती से लगाये रखना थाती पुरखों के सम्मान की,
चैन की बंशी बजा के सोती आज़ादी चादर तानियाँ,
नौनिहालों शौर्य ……..जय भारती ……|

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