बलिदानो का पुण्य महूरत !!!

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बलिदानो का पुण्य महूरत,आता नहीं दुबारा
उठो देश के वीर सपूतो,भारत माँ ने पुकारा……………….।

जिनसे तुमको अन्न दिया,अपने जल से सींचा
उस माँ का मस्तक देखो होने न पाये नीचा
सिर काटना मंजूर हमे,सिर झुकना नहीं गवारा…………..।
उठो देश के वीर सपूतो,भारत माँ ने पुकारा……………….।

उठो कि…शस्त्र उठाओ,दुश्मन के आँख उठाने के पहले….।
मर्यादा पे भारत माँ की दाग लगाने से पहले…………।
चीर दो सीना उसका,जिस दुश्मन ने ललकारा…………….।
उठो देश के वीर सपूतो,भारत माँ ने पुकारा……………….।

हम उनको समझौते के कई बार दे चुके मौके
और नहीं मनमानी उनकी…नहीं और अब धोखे ……..।
उनको अपना शौर्य दिखा दो,जो समझे हमे बेचारा………….।
उठो देश के वीर सपूतो,भारत माँ ने पुकारा……………….।

तुमने की जो शुरू कहानी ,हम खत्म करेगे वो किस्सा…..
एक टुकड़ा भी न देगे उसमे,जो मेरे घर का हिस्सा…..।
हमको को अपना मुल्क बैरियो है प्राणो से प्यारा…………।
उठो देश के वीर सपूतो,भारत माँ ने पुकारा……………….।

सौगंध तुम्हें भारत माँ की…कि वार ये खाली जाए न…..।
गोली जड़ना छाती पर….पर तू पीठ कभी दिखलाए न……।
मुल्क रखेगा याद हमेशा ये बलिदान तुम्हारा………..।
उठो देश के वीर सपूतो,भारत माँ ने पुकारा……………….।

जनने वाली माँ को भूले….ब्याही पत्नी को भूल गए
कुछ वो भी वीर सपूत तो थे…जो हंस कर फांसी झूल गए….।
आजादी के लिए जिनहोने प्राणो को बलिहारा………..।
उठो देश के वीर सपूतो,भारत माँ ने पुकारा……………….।

सूनी जिनके गांवो की गलिया…जिनके घर का आँगन खाली है..।
सूने होली के रंग जिसके…जिसकी बे रौनक दीवाली है…..।
उस कठिन तपस्या से दुश्मन… होगा दमन तुम्हारा………..।
उठो देश के वीर सपूतो,भारत माँ ने पुकारा……………….।

सर्द स्याह रातो मे भी जो पलक नहीं झपकता….।
तपता गरम मरुस्थल जिसका साहस नहीं डिगाता…..।
हर मान कर कदम खीच ले…..वरना अबकी जाएगा मारा……।
उठो देश के वीर सपूतो,भारत माँ ने पुकारा……………….।

माना हम ने कि सबको जीवन देता है ईश्वर ……।
रक्षा करता तू जीवन कि……तू ईश्वर से भी बड्कर…….।
ये ‘गौरव गाथा ‘ करती ‘शत-शत’ नमन तुम्हारा………।
उठो देश के वीर सपूतो,भारत माँ ने पुकारा……………….।

बलिदानो का पुण्य महूरत,आता नहीं दुबारा
उठो देश के वीर सपूतो,भारत माँ ने पुकारा……………….।

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