बोलें जिनके कर्म ही ….

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बोलें जिनके कर्म ही ….

बोलें जिनके कर्म ही ,ओज भरी आवाज़,
ऐसे दीपित से रतन ,जनना जननी आज ।
जनना जननी आज, सुता झाँसी की रानी ,
वीर शिवा सम पुत्र ,भगत से कुछ बलिदानी ।
कुछ बिस्मिल आज़ाद ,नाम अमृत रस घोलें,
गाँधी और सुभाष ,भारती माँ जय बोलें । |

बहुरंगी दुनिया भले , भा गए रंग तीन ,
बस केसरिया ,सित ,हरित , रहें वन्दना लीन ।
रहें वन्दना लीन ,सीख लें उनसे सारी ,
ओज,वीरता ,त्याग ,शान्ति हो सबसे प्यारी।
धरा करे श्रृंगार , वीर ही रस हो अंगी ,
नस नस में संचार ,भले दुनिया बहुरंगी।।

एक लडा़ई कल लडी़ ,एक लडा़ई आज ,
विजयी गाथाएँ लिखें ,जियें मातृ भू काज ।
जियें मातृभू काज ,मिटाऎँ सब अँधियारा,
खोलें नयन कपाट , दिखाऎँ ,कर उजियारा ।
भारत रहे महान ,सकल जग करे बडा़ई ,
ठान तमस से रार ,लडे़गें एक लडा़ई ।।

लेंगे अपने हाथ में ,सच की एक मशाल ,
भले अधर पर मौन हो ,कलम कहे सब हाल |
कलम कहे सब हाल ,व्यथा अब सही न जाए ,
जन गन मन की पीर ,भला क्यूँ कही न जाए |
रखनी पैनी धार ,सोच कब बिकने देंगे ,
सच की सदा मशाल ,हाथ में अपने लेंगे

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