भगत सिंह , राजगुरु और सुखदेव को समर्पित

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भगत सिंह , राजगुरु और सुखदेव को समर्पित

थे बड़े सजीले वह दूल्हे
वैसी ही थी बारात चली
हर दिल भीतर से रोता था
पर चेहरे थी मुस्कान सजी

मुख मंडल पर वह आभा थी
शत शत सूरज भी शर्मायें
हौसलों में वह बुलंदी थी
हिम शिखर के मस्तक झुक जायें

अधरों पर जयजयकार लिए
अंत:स में माँ का प्यार लिए
वे चले आज जिसको वरने
वह दुल्हन थी बेताब खड़ी

कितना प्यारा आलिंगन था
सारे देवों के शीश झुके
मनसा वाचा और कर्मों से
वे जोड़े मिलकर एक हुए …

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