‘भारत’ कहलाने आए हैं

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कर तिलक तेरी माटी का माँ
ये शपथ उठाने आए हैं
रोशन करने को तेरा जहाँ
हम खुद को जलाने आए हैं

कुछ लोग घरों से निकले हैं
कुछ आवाज़ें तो गूँजी हैं
ये शोर नही हंगामा कोई
बस सबको जगाने आए हैं
रोशन करने को……

क्रांतिकारियों के बलिदान को
यूँ ही न जाने देंगे
उनके सपनों का ‘भारत’
सच्चाई में लाने आए हैं
रोशन करने को……

हम हैं संतान तेरी इस पर
है अपरिमित गर्व हमें ए माँ
हम भी अपने कृत्यों से तेरा
सर ऊँचा उठाने आए हैं
रोशन करने को……

अंधेरों से कोई कह दे ये
दिन उनके ढालने वाले हैं
जो अस्त न हो, तेरे क्षितिज पे माँ
सूरज वो उगाने आए हैं
रोशन करने को……

चाह नही तेरे दिव्य भवन की
दीवारों में सजे जीवन
बनके नींव के पत्थर हम तो
खुद को छिपाने आए हैं
रोशन करने को…….

है स्वप्न यही इन आँखों में
तुझे विश्व-गुरु बनता देखें
दुनिया के शिखर पे ‘तीन-रंग’
तेरे हम फहराने आए हैं
रोशन करने को……

तेरी संस्कृति तेरी सभ्यता
से जग ने जीना सीखा
तेरी ‘गौरव-गाथा’ को
हम फिर से गाने आए हैं
रोशन करने को……

भारत धर्म है भारत कर्म है
पहचान हमारी भारत है
धर्म जाति के भेद मिटाके
‘भारत’ कहलाने आए हैं
रोशन करने को……

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