भारत माँ का कर्ज़

Posted by
|

देशभक्ति का यह जज़्बा
हर दिल में जनम नहीं लेता,
निज सुख को तज स्वदेश हित में
हर कोई जतन नहीं करता |
है खास नस्ल उन वीरों की
जो सरहद पर डट जाते हैं,
सीमा की रक्षा करने को
अपना सर्वस्व लूटते हैं |
अपनी आज़ादी की खुशबू को
तनमन से वश में रखना,
जीवन की मोहक धारा में
मत अपने को बहने देना |
अपने को खरा बनाना तुम
यूँ तपन झेल कर सोने सा,
गाँधी सुभाष भी फक्र करें
ऐसा तुम देश बना देना |
ये स्वतंत्रता जो मिली हमें
अपने सत्कोटि शहीदों से,
वो अल्फ़्रेड पार्क, जलियाँवाला,
अट्ठारह सौ सत्तावन की प्रथम क्रांति |
अब अलग नही हो सकते हम
अपनी बहुमूल्य विरासत से,
हो कोई देश हो कोई जाति
मन में रक्खे न कोई भ्रांति |
भारत माता की ओर बढ़े
हर हाथ को चकनाचूर करें,
वो मुँह की खाएगा हमसे
जो अखण्ड हिंद के खण्ड करे |
यह सत्प्रण है उन वीरों का
जो सीमा पर मर मिटे लड़े,
गाँधी, सुभाष, नेहरू, बिस्मिल,
रानी, आज़ाद, सुखदेव, भगत,
विक्रम बत्रा, मनोज पांडे, नायर
जिन संग गुमनाम शहीद बड़े |
अब वक़्त हमारा आया है
हमको कुछ साबित करना है,
इन वीरों ने जो देखा था
वो सपना पूरा करना है |
है क़र्ज़ हमारे ऊपर भी
इस माटी का इस धरती का,
देकर अपना भी योगदान
हमको यह क़र्ज़ चुकाना है |
कुछ दुश्मन तो भाग चुके
कुछ दुश्मन अब भी बाकी हैं,
कर शंखनाद हुंकार भर
हमें उनको मार भगाना है,
भ्रष्टाचार, ग़रीबी, बेरोज़गारी
को जड़ से हमें मिटाना है |
हमको कुछ और नही करना
नहि कोई मुहिम चलानी है,
तन मन कर पाक़ शुद्ध सबको
अपना कर्त्तव्य निभाना है |
हर माँ का फ़र्ज़ वह बच्चे में
ऐसे पावन संस्कार भरे,
जो लहू बने दौड़े रग में
किंचित सन्मार्ग से हो ना परे |
हर शिक्षक अपने शिष्यों में
ऐसी शिक्षा संचरित करे,
वह राष्‍ट्र विकास राष्‍ट्र हित में
अपना प्रयास भर पूर करे |
नैतिकता से परिपूर्ण नस्ल
जिस दिन तैयार कर सकेंगे,
हम भ्रष्टाचार, ग़रीबी जैसे
दुश्मन को परास्त कर सकेंगे |
जो सपना देखा अमन चैन का
देश के वीर शहीदों ने,
उस सपने को साकार बना इस
माटी के ऋण से उऋण हो सकेंगे |

Add a comment