मिट्टी की महक

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धर्म-ग्रन्थ, मन्त्र-यंत्र, लोक-तंत्र में सदा निहित रहे…
दान-पुण्य, धन-चमन इस भुवन में सदा फलित रहे |
देश-भक्त की जन-हित आशा, भू पर सदा तपित रहे,
मात्री-भूमि की शौर्य-विलासा, मन में सदा गठित रहे !

विराट जन जो शास्त्र को सर्वदा नकारते,
विज्ञान के प्रकाश में धर्म-ज्ञान ताड़ते !
राम-कृष्ण के कथा क्या काल्पनिक हैं ?
आवें! आर्यावर्त के इतिहास को पुकारते…

ग्रन्थ हो कुरान का या हो ये बाइबल…
इतिहास है गवाह इनके आस्तित्व की
फिर क्यों न शोध हो रहे वेद-ज्ञान की
गीता और रामायण-सी महा-काव्य की !

हर पौराणिक काव्य की कुछ तो जड़ें हैं
राम की साम्राज्य की हर तथ्य गड़े है…
आवो कोई विज्ञान की तलवार से कुरेदें
जो सत्य शिव है, तो नग्न अक्ष से देखें !

महाभारत का संग्राम के तथ्य आकार विहीन
वेदों में वर्णित दृष्टी के वेग के आयाम विलीन
गीता के आध्यात्म वाण के सारे गान निर्बोध,
धरती अपनी महक रही पर अंग रहे सब थोथ !!

हर प्राथमिक कक्षा की पुस्तक में यह बतलाओ,
अगर कृष्ण के वंसज हैं, तो हमको ज्ञात करा दो,
इस हिंदुस्तान की भूमि पर हुए अवतार अनेको,
हमें राम, कृष्ण की नगरी का इतिहास बता दो !!

मस्जिद, गिरजे सबको हमने खूब संवारा है,
परमहंस और साईं जी को दिल में उतारा है…|
मदर टरेसा, राष्ट्रपिता का विश्व में काया है,
फिर क्यों? आखिर क्यों??
मिट्टी की महक को हमने भांफ न पाया है !

आओ शोध करें हम देश की सुखी जर्जर मिट्टी में
हर सच्ची खोजों को डालें इतिहासों की गुच्छी में…!
विज्ञानों की पुस्तक में कुछ धर्म की बातें भी होती,
तो बचपन से ही राम-रहीम की शंका मन में न होती !!

— प्रभात कुमार (Prabhat Kumar)

Comments

  1. Raghwendra Singh

    August 10, 2012

    Dear Prabhat G,

    Awesome Poetry with unlimited depth in this Young Age.

    All the Best!!!!! No body can reach nearby You.

    God bless You !!!

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