वंदेमातरम् ! वंदे !! कण-कण से हर गली-गांव से , घर-घर से , सब नीड़ों से ,

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वंदेमातरम् ! वंदे !!

कण-कण से हर गली-गांव से , घर-घर से , सब नीड़ों से ,
होता है जयघोष… किलों-गढ़-दुर्गों की प्राचीरों से ,
वंदेमातरम् ! वंदेमातरम् ! वंदेमातरम् ! वंदे !!
जीत नहीं पाएगा दुश्मन हिंदुस्थानी वीरों से !!

केशर दसों दिशाओं फैला , कमल मृदुल मुसकाए !
भगवा विजय-पताका नीले अंबर तक लहराए !
रौद्र रूप की झलक देख’ हर महिषासुर थर्राए !
रणचंडी जब चली भाल पर शोणित तिलक लगाए !
रानी लक्ष्मी कोटि कांतिमय कोहेनूर के हीरों से !
जीत नहीं पाएगा दुश्मन हिंदुस्थानी वीरों से !
वंदेमातरम् ! वंदेमातरम् ! वंदेमातरम् ! वंदे !!

हमसे घात न करना , हर ज़ालिम को नेक सलाह है !
निज पद से ना कंटक कुचले ; कहो , कौन सी राह है ?
हृदय पराक्रम अ द् भु त पौरुष-परावार अथाह है !
निज घावों को सहलाने की… सुनो किसे परवाह है ?
ख़ौफ़ नहीं सांगा को खल-दल की तोपों-शमशीरों से !
जीत नहीं पाएगा दुश्मन हिंदुस्थानी वीरों से !
वंदेमातरम् ! वंदेमातरम् ! वंदेमातरम् ! वंदे !!

कई ग़ज़नवी , कितने ग़ौरी… सबको धूल चटाई !
जिसने आंख उठाई ; गर्दन उसकी वहीं उड़ाई !
पुण्य-भूमि पर धर्म-पताका लाख बार फहराई !
पृथ्वीराज , प्रताप , शिवा ने विजय-रागिनी गाई !
छिछलों की तुलना मत करना हमसे गहन-गंभीरों से !
जीत नहीं पाएगा दुश्मन हिंदुस्थानी वीरों से !
वंदेमातरम् ! वंदेमातरम् ! वंदेमातरम् ! वंदे !!

लहू उबलता हुआ हमारी रग-रग में बहता है !
राष्ट्रभक्ति का हृदय-हृदय… इक सैलाब उफनता है !
घर में हमारे कोई दुश्मन अब कैसे रहता है ?
निपटेंगे गद्दारों से हम , हर बेटा कहता है !
भगत , पटेल , सुभाष ना डरें बम-बंदूकों-तीरों से !
जीत नहीं पाएगा दुश्मन हिंदुस्थानी वीरों से !
वंदेमातरम् ! वंदेमातरम् ! वंदेमातरम् ! वंदे !!

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