वर दो माँ भारत माता !!

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वर दो माँ भारत माता
देश तुम्हारी मिट्टी ने ,हमको संघर्ष सिखाया है,
दौड़ रहा जो रक्त रगों में,देह ने तुमसे पाया है //
है आभार उन्हें शत-शत,जिनके बल पर आज़ाद हुए ,
उनको वंदन कोटि-कोटि,जिनके श्रम से आबाद हुए //
है धिक्कार उन्हें जो धरिणी,नोच डालने को आतुर ,
है लानत जो स्वाभिमान को, बेच डालने को आतुर //
युद्ध शेष है विजय गान की ,गाथाएँ फिर गानी हैं ,
पावनतम आँचल में दूध की,नदियाँ लहरानी हैं //
चन्द्र-सूर्य-सम चलें निरंतर,कहीं विराम न लेना है
उन्नति का नभ छुए बिना,क्षण भर विश्राम न लेना है //
प्रवहमान जनशक्ति देश में ,परिवर्तन लाएगी ,
विश्व गुरु होने की संज्ञा ,वापस फिर आएगी //
देश न उन्नत होगा जब तक ,जनगण सुदृढ नहीं होंगे ,
मातृभूमि के ऋण से हम,मर कर भी उऋण नहीं होंगे //
उच्च स्वरों में गाएँ हम,निशिदिन शुभ गौरव गाथा /
मातृभूमि के चरणों में हम ,नित्य नवाएँ माथा //
आओ हों समवेत पुनः बन जाएँ भाग्य विधाता ,
सुप्त चेतना जाग्रत हो ,वर दो माँ भारत माता //
– भावना तिवारी-

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