वीरों को नमन

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कठनाइयों की चले आँधी अड़चनें बन जाए तूफान|
फिर भी ना ढले जो पथ से कहलाते वो ही वीर महान||

चाहे आकाश से बरसे आग या तीरों की हो बौछार|
मातृभूमि के लिए झेलते सिने पे शत शत प्रहार||

हर पत्ता बने भाला हर डाली बने तलवार|
जब देश पर मर मिटने को हर इंसान हो तय्यार||

स्वतंत्रता के लिए जिन्होने कष्ट सहे अपरंपार|
उन वीरों को सर झुकाके नमन करूँ मैं सैंकड़ो बार|

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