शहीदों की याद

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आओ याद करें उनको
जिन्हें भुला चुके हैं लोग यहाँ.

सूरज अस्त नहीं होता था
अंग्रेजों के राज में ,
चुभते थे वे अत्याचारी
भारत में के ताज में .
निकल पड़े कुछ लोग घरों से
करने माँ की दूर चुभन ,
मन में था साहस अदम्य
और बंधा हुआ था शीश कफ़न.
तन घायल था मन घायल था,
अधरों पे नए तराने थे.
उनके पास भी घर में
रुक जाने के कई बहाने थे.

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