“सबसे प्यारा-न्यारा हिंद है”

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“सबसे प्यारा-न्यारा हिंद है”

इस अंजुमन में गुलजार जिस्म का हर चिराग हिंद है ,
रूह पे ओढे हुए वतनपरस्ती का हर लिबास हिंद है !
बहती है वतनफरोशी इबादत की तरह यंहा हर लहू में ,
दिलों पर लिखी पावन इबारतों का कलाम हिंद है !

है हमारे खून का कतरा-कतरा रंग तिरंगा,
और जिस्म का अंश -अंश हिंद है !
बारोह माह देशप्रेम का मौसम यंहा एक सा,
धरती पर खुदा का बेमिसाल कमाल हिंद है !

है तिरंगा अहद हमारी आन के स्वर्णिम गौरवगाथा की,
पारवानावार देशभक्त यंहा हर आग का नाम हिंद है !
मकिने दिल शाने-भारत ,क्रांतिवीरो की मिट्टी ,
इस गुलिस्तान की आबोहवा का श्रंगार हिंद है !

पढ़ती है शहीदों की चिताएं भी हिंद्प्रेम के गीत यंहा,
हिन्दू-मुस्लिम-सिख-इसाई कौम का हर सिंह हिंद है !
पैदा होता है हर हिन्दुस्तानी सरफरोशी की तमन्ना लिए,
वतन पर मर मिटने वाले सीनों का फौलाद हिंद है !

मिलती है इस चमन की खुशबुएँ भी गले अमलन,
इस मुल्क की मिट्टी-तरु-फूल-प्रस्तर तक हिंद है !
इसकी हिफाजत में शौक से कट जाते है लाखो सर यंहा,
आजादी के रंगरेज मतवालों का पैगाम हिंद हैं !

डोला मुगलों-अंग्रेजों का सिहासन जब हमने हुंकार भरी ,
झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की मर्दानी सिह्नाद हिंद है !
लिखा टीपू की बेखौफ तलवार ने स्वर्णिम अध्याय ,
छत्रपति शिवाजी और महराणा प्रताप का अमुल्य बलिदान हिंद है

पाशमुक्त भारत मस्ताने मंगल पांडे के बलिदानों की अमर कहानी है ,
वीर भगतसिंह के अमूल्य त्याग की अमरज्योति का प्रकाश हिंद है !
लाल-बाल-पाल ने दिया हमे स्वराज्य का मौलिक अधिकार ,
लौहपुरुष बल्लभभाई की लौह दृढ़ता का अंजाम हिंद है !

कर गए परिपाक गांधी-नेहरु-अम्बेडकर संविधान की जड़े,
अनगिनत हाथों की लकीरों में लिखी भाग्यलिपि हिंद है !
हिंदफौज के पुरोधा युगांतरवीर बोस बाबू फक्र है इसका ,
अथक अमरवीर चंद्रशेखर की अमर आजाद उड़ान हिंद है !

महाकवि गुरुदेव ने राष्ट्रगान से उलगुलानों में फूंका प्राण,
बंकिम जी के कालजयी राष्ट्रगीत का अतुल्य योगदान हिंद है !
किया बिस्मिल ने अखंड सरफरोशी से घात हिंद के दुश्मनों पर ,
जन-गण-मन, वन्देमातरम की अभ्यर्थना का इन्कलाब हिंद है !

विद्यापीठ तक्षशिला-नालंदा से ज्ञानगुरु हिंद ने दिया विश्व को ज्ञान,
आर्यभट्ट का विश्व को जीरो का अमूल्य दान हिंद है !
भाषाई सम्राट संस्कृत से लिया एटम ने अणु का नाम,
अलजेब्रा त्रिकोणमिति,केलकुलस का जन्मस्थान हिंद है !

आयुर्वेद के जनक भारत ने किया विश्व कल्याण ,
पृथ्वी की रवि परिक्रमा का खगोलीय अनुमान हिंद है !
पाई के मूल्यांकन का गणितशास्त्र का इतिहास है विश्व प्रसिद्ध ,
मार्यादा ,परम्परा ,संस्कृति की भव्यता का धाम हिंद है !

है गिरिराज हिमालय प्रहरी और माँ गंगा इसकी प्राण है,
कश्मीर से कन्याकुमारी का स्वर्गीय विस्तार हिंद है !
ऋषि-मुनिओं की तपोभूमि ,देव-देविओं की जन्भूमि भारत ,
देवल-दरगाह-चर्च-गुरुद्वारों के मुव्वहिद का उदगार हिंद है !

हल जोतता हलधर इस मातृभूमि की शान है ,
सरहद पर तैनात वीर जवानों का स्वाभिमान हिंद है !
खेल के मैदानों पर उठाते है इसे अपने शानो पर खिलाड़ी ,
होली-ईद-दीवाली-रमजान त्योहारों का सौहाद्र हिंद है !

लोकतंत्र है राष्ट्रधर्म यँहा हर हिन्दुस्तानी का ,
बहु धर्मी-भाषा-जाती-अनेकता में एकता की मिशाल हिंद है
है सत्यमेव जयते मूल मन्त्र हमारी न्याय व्यवस्था का,
जम्बूद्वीप,अजानभदेश,सोने की चिड़िया सब नाम हिंद है

नेस्तानाबूद कर दे अरि मंसूबों को, तरेरे जो तुझ पर नजरे भारत,
हवादिस आतंक से लड़े मिल के निसिबासर, हम बेखौफ हिंद है !
गर है दहशतगर्दो के पास असलाह-गोला-धोखा-बारूद,
तो हमारी जिरहंबख्तर के अंगार का उबाल हिंद है !

खौफजदा लाडो की आँखे ,बेनूर हो रहा नन्हा बचपन
कैसे हम इस मुर्दापन सी निष्ठुरता में जीवित हिंद है
वह कौन निशाचर जला रहा जो दंगों की भट्टी पर भारत
उसे रौंदने को फड़क रही भुजाएं और हिय में भूचाल हिंद है

भ्रष्टासुर लील रहा धीरे-धीरे नोच-नोच माँ भारती को
क्यों शमशानी चुप्पी से तू जडवत खामोश हिंद है
न बना वफादारी को किसी धर्म-रंग-जात-वर्ग-पार्टी का टट्टू
तेरे देशप्रेम और कुर्बानी का आज इम्तिहान हिंद है

अब वक्त नहीं रहा बन्दे चुप्पी बन सहने का
तेरे सत्याग्रह की आहुति के महाव्रत को बेताब हिंद है !
कितने काले सूरज और उगेंगे, कितने मटमैले डूबेंगे चाँद
तुझसे एक नई उजियारी सुबह के आमद को पूछ रहा हिंद है !

अकीदत रहे हर भारतवासी को अर्जमंद आर्यवत इतिहास की,
मातृभूमि की रक्षा को उठने वाली हर प्रतिकार हिंद है !
आओ खत्म करे सरहदे बैर-भाव,मजहबों की दीवार की ,
बजसिन्हा नव भारत के स्वपन को,मेरा मुश्ताक हिंद है

अब घायल इंडिया बेटी-भ्रूण ह्त्या -बलात्कार-कुपोषण-घोटालों के घावों से,
जगा जमीर के तेरे मेहनतकश हाथों में अब इंतजाम हिंद है !
सिमट न रह जाए भारतप्रेम पंद्रह अगस्त-छब्बीस जनवरी की तारीखों तक,
सौगंध तुम्हे नव भारत निर्माण की, कह्कशों में लिखो लहू से “सबसे प्यारा-न्यारा हिंद है” !

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