सशक्त नौजवान : अदम्य क्रांति

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जेहन में आई देशभक्ति की तरंग
हृदय में स्वारित हुआ मधुर मृदंग
आज़ादी-गाथा आज गुनगुनाता भृंग
झलकता वीरों में उत्साह रंग-बिरंग
गणतंत्र रहा है आजादी का शाश्वत भरतार
अभिव्यक्ति का आज यह नव-अवतार
शत्रु करते रहे इंसानियत तार-तार
अचानक धराधर ने बरसाया जल-मूसलाधार
और गिरि से उड़े क्रांतिकारी पखेरू हज़ार
असीम गगनचुम्बी परवान छुए बार-बार
निष्कपट पीकर गरल, चूम लिया शिखर
कौड़े-लाठी-भाठा का करते हुए तिरस्कार
आज मतवारा-मंत्रमुग्ध हुआ हर राष्ट्रभक्त
नई आभा, नई प्रभा – आज़ादी का वक्त
अमूल्य-अतुल्य इन शूरवीरों का रक्त
जितनी बार करो याद, कम हैं अरब-करोड़-लाख-हज़ार
यह गौरव-गाथा रखेंगे याद हमारे तात
बनाया है नव-इतिहास, अंग्रेजों को देकर मात
शहीदों की ये पवित्र काया, पवित्र गात
आज शहादत को करो सलाम, भूल कर जात-पांत
वाहित हो रही उमंग की मलय-वात
वंदन-गायन-पूजन योग्य हमारी भारत मात
कायम कर मिसाल, जगा डाली क्रांति-जोत
आह्वान भाव लिए उड़ते गये नित-कपोत
इन अमर-वीरों की होती रहे सदैव अर्चना
जिन्होंने की कायरता-अज्ञानता-दासता से घ्रणा
इनमें ही पली राष्ट्रप्रेम की अदम्य तृष्णा
राष्ट्र को पहुँचाया फर्श से अर्श तक
लड़ते रहे वो महावीर अंतिम दम तक
चेतना से भरकर जोशीले राग किये उदधृत
मूल रहा सेवा-निष्काम, जब तक गये मृत
इक्कीसवीं सदी के नए युग का है आगमन
उन्नति का लेकर प्रण, मिलकर करें अभिनन्दन
तरुण-जवानों से जमकर करें आह्वान-निवेदन
कि करके तुम देशभक्त-राष्ट्रवीरों का अभिवादन
नवयुवकों को मैं प्रेरित करता होकर अंतर्ध्यान
उठ खड़े होकर कर दो बुराइयों को छिन्न-भिन्न
उन्नति का असीम परवान हासिल करने का करो प्रयत्न
लाओ भारत में खूब कांस्य,रजत,स्वर्ण,हीरा,मोती,रत्न
लहराओ हर क्षेत्र में भारतीय परचम, बनकर तुम शत्रुघ्न
नवयुवकों को मैं प्रेरित करता होकर अंतर्ध्यान
भरपूर करके देश-सेवा, जीवन का देश हेतु कर बलिदान
कहलाकर तुम अमर-वीर, बन जाओ भारत की शान
गाते रहो सदेव इन्कलाब-जिंदाबाद का मधुर गान
दीनों के बनकर तुम बन्धु, बनाओ उन्हें विपन्नता-हीन
नवयुवकों को मैं प्रेरित करता होकर अंतर्ध्यान
भ्रष्टाचार,नक्सलवाद,भेदभाव को कर डालो क्षीण
अधीनता का करके उल्लंघन, लाओ नई उषा किरण
दांव पर लगते हुए स्वयं की आन-बान-शान
कलयुगी-राक्षसों को पहुंचा डालो शमशान
नवयुवकों को मैं प्रेरित करता होकर अंतर्ध्यान
स्पेक्ट्रम का बंटवारा या हो कोयले की खान
विधायक-मंत्री-सांसद हो चुके रिश्वत की दुकान
आज हर व्यभिचारी की आफत में है जान
न तो रहा इनका अब रुतबा, न ही शान
नवयुवकों को मैं प्रेरित करता होकर अंतर्ध्यान
2014 में जनता रखेगी हर प्रत्याशी का ध्यान
स्वच्छ-छवि वालों का ही होगा संसद को प्रस्थान

मुगदर हिला रही आक्रोश की ज्वाला
वीरों ने क्रांति में सारा जीवन झोंक डाला
आज गूँज रही राष्ट्र में क्रांति-मशाल
हिन्दोस्तां के पास है फ़ौज विशाल
मुगदर हिला रही आक्रोश की ज्वाला
राष्ट्र-उत्थान के गुणधर्म जो की पुण्य,पावन व सजीला
आज हर राष्ट्रभक्त महायज्ञ में आहुति देने को मतवाला
धधकती क्रांति से होगा भ्रष्टाचारियों का देशनिकाला
स्वर्णाक्षरों से सजेगी, सद्कर्मों की खुशबूदार शिला
रक्तप्लावित स्वर एक उफान पैदा करता
मैं नम्रता में भी क्रांति-सुर जगाता फिरता
दुनिया के समक्ष गाड़ डालो भारतीय झंडा
राष्ट्र-उन्नति को मानते हुए एजेंडा
विन्ध्याचल से हिमालय, फतह कर एवेरस्ट
तरुणाई ही लाएगी प्रगति का सुपरजेट
आतंकवाद-आरक्षण की सुलग रही आग
बुरे नेताओं ने ही अलापा यह राग
पूर्व चलने के बटोही अब तो तू जाग!
जनता को समझना होगा यह मर्म
कुपोषण को कहती है सरकार “राष्ट्रीय शर्म”
ऐसी कर्तव्यहीनता नही है इनका जुर्म ?
दग्ध-क्रांति की ज्वाला भड़क पड़ी है आज
क्षुब्ध-जन की जोशीली है आवाज
जनलोकपाल को सभी दलों ने है नकारा
सशक्त-भारत का ख्वाब इन्होने कहाँ विचारा?
करना ही होगा अपराधी-सांसदों का अंत
समस्याएं अनेक बढ़ रही हैं ज्वलंत
भारत माँ का करते हुए अदभुत गुणगान
राष्ट्रहित में न्योछावर कर दो प्राण
हर राजनेता के जेहन में केन्द्रित है बेईमानी
दुर्गुणों की अव्वलता में नहीं इनका कोई सानी
राजस्थान के जल-मंत्री की रही शोचनीय कहानी
संपूर्ण राज्य को कर डाला उसने पानी-पानी
मेरी कृति में समाहित है जनता की जागृति
जनतंत्र में जनता की सुनते क्यों नहीं मंत्री?
मंत्रियों के लिए सार्थक-प्रजातंत्र का नहीं रह गया कोई मोल
भ्रष्टाचार-व्यभिचार ही बन गया इनका अब “गोल”
राष्ट्र की अवनति में निभा रहे ये महत्पूर्ण रोल
जनता को चुनना ही होगा “राईट टू रिकाल”
गंभीर समस्याओं को न समझें युवक अवध्य
स्वच्छ-राजनीति हेतु करना ही होगा सद्बुद्धि यज्ञ
देशभक्ति पुनः करानी होगी इन्हें हृदयंगम
सुशासन की बात जानी चाहिए पूर्णतः रम
अटूट-अद्वितीय-अनुशीलनता का करते हुए संगम
दृढ-निश्चित होकर उत्थान कार्य करो विहंगम
वात्सल्य-स्नेह का पाकर दामन
पराक्रमी बन कर डालो बुराइयों का दमन
नव-सृजित कर दो यह चमन
पुनः खिलखिला उठें अनन्य सुमन
सभी दलों ने राष्ट्र लूटकर लड्डू तो खाया, नारियल भी फोड़ा
देश की अर्थव्यवस्था की कमर को भी तोड़ा
चुनाव के समय गला फाड़कर चिल्लाते ये इन्कलाब-जिंदाबाद
पूछो ज़रा इनसे, इसका मतलब है इन्हें याद?
आतंक में अलकायदा और देश में बाकायदा हो रहे प्रचंड
एकजुट होकर करना ही होगा इन्हें खंड-खंड
हे नौजवानों! ग्रहण करो नव-श्रद्धा और आशीष
थामते हुए अडिग-अविचल शिरीष
अरविन्द करता रहता एक आह्वान नित
लोकतंत्र की बुराइयाँ कर डालो चारों खाने चित
करते रहो कार्य एक से बढ़कर एक
राष्ट्र को बना डालो अत्यंत नेक
आर्थिक-महाशक्ति की दावेदारी का पेश करते हुए अदभुत नमूना
बहा डालो फिर से, उन्नति की गंगा-विकास की यमुना
जगत-गुरु की भाँति बनाओ इसे अमर-अटल सिरमौर
हे क्रन्तिकारी! नव-क्रांति की ज्वाला निज मन में फूँक डाल
दुआ कर, आना नए जोश से “15 अगस्त” हर साल

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