हे भारत भूमि!

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शामे अवध हो या सुबहे बनारस
पूनम का चन्दा हो चाहे अमावस

अली की गली, महाबली का पुरम हो
निराकार हो या सगुण का मरम हो

हो मज़हब रिलीजन, मत या धरम हो
मैं फल की न सोचूँ तो सच्चा करम हो

कोई नाम दे दो कोई रूप कर दो
उठा दो गगन में धरा पे या धर दो

तमिलनाडु, आंध्रा, शोनार बांगला
डिमापुर, कवरत्ति, पुणे माझा चांगला

सूरत नी दिकरी, मथुरा का छोरा
मोटा या पतला, काला या गोरा

सिन्धु ए हिन्द से आती हैं लहरें
हिमालय सी ऊंची, पहुँची हैं गहरे

ग़ज़ब की खुमारी, मदमस्त मस्ती
है भारत ह्रदय में, यही मेरी हस्ती

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