अगाध

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दिल की गेहराई मे देख जरा।
अंदर जो जल रहा ,उसे रोख जरा
जला तो राख सा तू,दिये के साये मे तू।।

दिल की गेहराई मे देख जरा।
उठी है जो लेहरे अंदर, उसे तू पहचान जरा
डुबा तो लाश सा तू,यादो के अंगण मे तू।।

दिल की गेहराई मे देख जरा।
हाथ अपनो का थांबे, खुशी को संभाल जरा
हसा तो चांद सा तू,कभी सया तो कभी उजाले मे तू।।

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