अमीरी का सच

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ख़्वाहिशो के भोज में हर अमीर दबा है|
उस ग़रीब से जाकर पुछ ख़्वाहिश होती क्या है|
किसी को ख़ुशियाँ सब पाकर भी नहीं मिलती
कोई अपनी ख़ुशियाँ एक हँसी में धूँड लेता है|
अमीर अपनी दौलत ,उसकी शोहरत से अपनी अमीरी का दिखावा करता हैं |
यह ग़रीब चुप रहकर अपना दर्द छुपा लेता हैं |
ख़ालीपन तो अमीरों के महलों में होता हैं |
ग़रीब की कुटिया तो हमेशा भारी होती हैं |
अपनो में भी अपनापन नहीं मिलता उस अमीर को
वो ग़रीब को देख परायो को भी अपना बना लेता है |

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