अर्पित करूँ मैं क्या तुझे ओ देश मेरे

Posted by
|

अर्पित करूँ मैं क्या तुझे ओ देश मेरे

अर्पित करूँ मैं क्या तुझे ओ देश मेरे तू बता ,
ओ देश तेरी शान से बढ़कर मुझे कुछ भी नहीं |
मैं माँ कहूँ माटी कहूँ या कह रहूँ तुझको ख़ुदा ,
ओ देश तेरे नाम से बढ़कर मुझे कुछ भी नहीं |
सुर में सभी मौसम सजे सुर में सजीं सब वादियाँ ,
सुर में सभी झरने सजे सुर में सजीं सब घाटियाँ |
सरिताएँ भी सुर में सजीं सागर भी सुर में हैं तेरे ,
सुर में सभी पर्वत सजे सुर में सजीं सब चोटियाँ |
स्तुति करूँ वंदन करूँ या कह रहूँ तेरी कथा ,
ओ देश तेरे गान से बढ़कर मुझे कुछ भी नहीं |
अर्पित करूँ मैं क्या तुझे ओ देश मेरे तू बता ,
ओ देश तेरी शान से बढ़कर मुझे कुछ भी नहीं |
दिल में तेरे मन्दिर लिए दिल में तेरे गुरुद्वार मैं ,
दिल में तेरी मसजिद लिए दिल में तेरी दरगाह मैं |
गिरजा भी तेरे दिल लिए स्तूप भी दिल में तेरे ,
दिल में तेरे खंडहर लिए दिल में तेरी मीनार मैं |
पूजा करूँ अर्चन करूँ मन मैं तेरी स्मृति सजा ,
ओ देश तेरे मान से बढ़कर मुझे कुछ भी नहीं |
अर्पित करूँ मैं क्या तुझे ओ देश मेरे तू बता ,
ओ देश तेरी शान से बढ़कर मुझे कुछ भी नहीं |
यदि तू कहे बिज़ली बनूँ यदि तू कहे अंगार सा ,
यदि तू कहे प्रस्तर बनूँ यदि तू कहे फ़ौलाद सा |
तलवार बन जाऊँ मैं तेरी ढाल बन जाऊँ तेरी ,
यदि तू कहे अंधड़ बनूँ यदि तू कहे सैलाब सा |
मैं हँसते हँसते प्राण दूँ और हो रहूँ तुझमे फ़ना ,
ओ देश तेरी आन से बढ़कर मुझे कुछ भी नहीं |
अर्पित करूँ मैं क्या तुझे ओ देश मेरे तू बता ,
ओ देश तेरी शान से बढ़कर मुझे कुछ भी नहीं |

Add a comment