ए वीरो तुम्हे हे सलाम।

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तुमने ना की किसीकी परवा, ना की कोई गुज़ारिश,
दुसरो की रक्षा करना हे तुम्हारी ख्वाहिश।
मर मिट्टे हे रोज इस भूमि पर कोई ना कोई,
शहीद होनेवाले तो सिर्फ तुम ही यही।
कर्ज इस मातृभूमि का सिर्फ तुम ही उतार जाओगे,
तुम सरहद पर खडे हमे यहा बचाओगे।
तुम्हारा शुक्रिया कैसे अदा करे, कैसे करे हम ये बया,
क्यौकि गोली खाकर देश कि सेवा करना ही तुम्हारा लक्ष बन गया।
इस देश के लिए आँखों मे ज्वाला तुम्हारी दिखती हे,
तिरंगे मे लिपटकर जब तुम आते हो माँ तुम्हारी रोती हे।
तुमने तो सच्चा किया उनके हर ख्वाब को,
आज़ादी के इतने सालों बाद भी लड़ते तुम दिन रात हो।
वज़ूद तुम्हारा हम नही समझ पाएंगे,
इतिहास की पन्नो पर तुम्हारी बातें तुम ही लिख जाओगे।
तुमहारे खून का हर एक बूंद इस वतन के लिए लढा हे,
तुम्हारी कफ़न पे तो हमारा ये देश खड़ा हे।

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