बेपनाह मोहब्बत

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चिलमन कि आढ़ ले के
सनम यू रूकसत हुए
बेपनाह मोहब्बत
बेपाक सारी कर गए।
ख्याले गम की कश्ती
निल समन्दर दूर तक
बिच भवर हम फंसे
वो दूर हम से चल दिए।
रूखसार उनका बाखुदा
दीदार रब से कम नही
बन खुदा नवाजी बना
किस ओर को निकल गए।
है ढूंढता ये दिल उन्हे
आवाज देता बार-बार
किसी मूकदर्शक कि भांति
बुत है वो बन गए।
ऐ खुदा होती मोहब्बत
चीज क्या है तू बता
जो मिल गए तो सवर गए
जो न मिले तो बिखर गए।
रहमत है मेरे मालिक तू
दूर है दुनिया कि भीर से
औकात उन की क्या यहा
जो मोहब्बत के सागर मे उतर गए।
अदम से आदमी बनाया ये कमाल इश्क कर गया
और फिर आदमी से अदम ये कैसा चल गया
हाले बया लफ्जो मे कैसे करे तू ये बता
तकिया-ए-आग़ोस ही बस जानती हाल क्या है अब मेरा।।

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