अनंत काल से भी पुरातन भारत

Posted by
|

जो अनंत काल से भी पुरातन,
ऐसे भारत का वर्णन करती हूँ
जो मृदुल मुकुल से भी नूतन,
प्यारे भारत की चर्चा करती हूँ।

जो अनंत काल से भी पुरातन,
ऐसे भारत का वर्णन करती हूँ
जो मृदुल मुकुल से भी नूतन,
प्यारे भारत की चर्चा करती हूँ।

ऋग, यजुर् अथर्व, सामवेदों का दर्शन है, -२
उपनिषद देते आध्यात्म का संदेश हैं,
संहिताओं में बसता विज्ञान विशेष है,-२
जहाँ निर्माता, निर्वहनकर्ता और मोक्षदाता,
श्री ब्रह्मा, विष्णु और महाकाल महेश हैं,
ऐसा पुरातन भारत मेरा देश है-२।

उत्तर में नगराज हिमालय विराजते,
दक्षिण में सिंधु चरण पखारते,
पूरब में अरब सागर है और,
पश्चिम में बंगाल की खाड़ी है।
जहाँ छः ऋतुएँ बड़ी ही श्रेष्ठ हैं
जहाँ की सभ्यता सबसे ज्येष्ठ है,
मैं ऐसे भारत का विवरण देती हूँ।

भारत का प्रतिक्षण विकास होता है,
कलाम और अटल जैसे भारत रत्नों से निर्माण होता है,
अब चाँद पर ही नहीं, मंगल पर भी पहुँच है हमारी,
प्रथम है भारत जो एक सौ चार
उपग्रहों का प्रक्षेपण एक बार करता है,
प्रथम है भारत जो एक सौ चार
उपग्रहों का प्रक्षेपण एक बार करता है।

सीमा पर जो हमारी सुरक्षा में तैनात रहता है,
बर्फ़ीली आँधियों में भी लड़ता रहता है,
बेटा, भाई, पति है जो किसीका,
उसे भारत का बेटा कहने पे नाज़ होता है-२
सर हमारा झुकता है उसे नमन को,
जो भारत माता की जय का स्वरनाद करता है।
जो भारत माता की जय का स्वरनाद करता है।

Add a comment