नन्हा सिपाही

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वो भीड़ में चलता छोटा बच्चा
रुक जाता है यूँ ठिठक कर
बैठ गया है वहीं सड़क पर,
कुछ अनमोल पा गया है शायद
हाथ में उठा कुछ झाड़ पोंछ रहा है शायद,
चेहरे का भाव बदल रहा है
वो मासूमियत में गर्व छलक रहा है,
माथे से लगा अपनी कमीज पर सजा लेता है
वो नतमस्तक हो तिरंगे को दिल से प्रणाम करता है।
वो भीड़ में चलता छोटा बच्चा
सीने पे संभाले तिरंगे को चल रहा है यूँ सिंह की भाँति,
जैसे डटा हो सीमा पर अपनी धरा की रक्षा को
बर्फ के योगी हिमालय की की भाँति,
देश का प्रहरी ….. वो सजग, निडर नन्हा सिपाही
कर लिया है प्रण जैसे देश के लिए मर मिटने का
वो भीड़ में चलता छोटा बच्चा
दे रहा है वचन स्वयं को भारत माँ की सुरक्षा का।
वो भीड़ में चलता छोटा बच्चा……

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