माँ पुकार रही है

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भारत वासी तुम्हे कोई पुकार रही है ।
सुन कर अनसुनी न करो वह चीख चिल्ला रही है
कहि एक कोने में बैठे आंसू बहा रही है ।
यु एकता और भाईचारे को बेड़ियो में न देख पा रही है
पहचानो उस माँ को भारत माँ पुकार रही है ।
हाथ में तिरंगा लिए , तिरंगे पे भ्रषटाचार का दाग लिये।
तुम्हे वह पुकार रही है
सुन कर अनसुनी न करो
वह आंसू पे आंसू बहा रही है ।
आंसू पोछ सको तो पोछ लो,
वरना गंगा बाढ़ ला रही है ।
द्वारा-सौम्या तिवारी

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