mera hindustaan bachaalo

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मेरा हिन्दुस्तान बचालो

मेरा देश बचालो कोई
लुटी जा रही चंदनबाडी
कोई रास सम्भालो बढ़कर
चढ जाए मेरा देश पहाड़ी
(१)

सूखी नदी प्यास के द्वारे
कुआ खोदन चले खिलाडी
सरपट दौड़ रहे हे पहिए
टूट गई रस्ते में गाड़ी
हरेक मिकेनिक बनकर आया
लेकिन निकले सभी अनाड़ी
मेरा देश——————

(२)

घर में चलता रहा सिनेमा
बाहर लुटती रही बज़ारिया
कौए सब आज़ाद हो गये
फसी जाल में सोन चिरैया
जिनको लकवा मार गया है
वे क्यों चला रहे है गाड़ी
(३)

श्रावन ने कुवेर को बाँधा
राम क्षीर सागर में सोए
दशरथ के बेटा नहीं होता
शृंगी ऋषि समाधि में खोए
सीता रोज़ हरी जाती है
सबने की लंका से यारी
मेरा देश——————–
(४)
चारों तरफ धूल की आँधी
बैठी साँस घुटन के का धे
उजली फिर हो जायें दिशायें
मुट्ठी भर कोई धूप दिखा दे
बेचैनी को इंतज़ार है
चमकदार मिल जाए खिलाड़ी !!!!

कवि–शिव नारायण जौहरी विमल

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